बुधवार, 2 मई 2012

kiska kiska hisab baki hai...


किसका किसका हिसाब बाक़ी है,
जाने क्या क्या अज़ाब बाक़ी है......
नब्ज़ देखो अभी भी चलती है,
हसरते टूट गयीं जान अब भी बाक़ी है.....
दिलों के ज़ख्म हैं आँखों की राह रिसते हैं,
तुम समझते हो कि आँसू हमारे बाक़ी हैं.....
सुनो एक बात पूछनी थी, मगर रहने दो,
तुम को क्या पता एहसास कहाँ बाक़ी है.....
मेरे गुनाहों की फ़ेहरिस्त ज़रा लम्बी है,
खुदा सुना चुका सज़ा भगवान अभी बाक़ी है.....
याद से ले लो तुम्हारा जो कुछ निकलता हो,
फिर न कहना कि हमारा हिसाब बाक़ी है.....
फिर क़यामत के दिन बस हम होंगे और खुदा होगा,
मेरा तुमसे नहीं , उस से हिसाब बाक़ी है.....

2 टिप्‍पणियां:

  1. सुनो एक बात पूछनी थी, मगर रहने दो,
    तुम को क्या पता एहसास कहाँ बाक़ी है....

    वाह सरिता जी वाह क्या ग़ज़ल कही है आपने. खास कर इस शे'र के लिए कुछ ज्यादा ही दाद कुबूल करें

    जवाब देंहटाएं
  2. दिलों के ज़ख्म हैं आँखों की राह रिसते हैं,
    तुम समझते हो कि आँसू हमारे बाक़ी हैं.....
    मेरे गुनाहों की फ़ेहरिस्त ज़रा लम्बी है,
    खुदा सुना चुका सज़ा भगवान अभी बाक़ी है.....
    याद से ले लो तुम्हारा जो कुछ निकलता हो,
    फिर न कहना कि हमारा हिसाब बाक़ी है..... mast Ghazal .........I read this 10-15 times....

    जवाब देंहटाएं